Ramakant Badarya BETAB
Sunday, 30 August 2015
HARSH: HARSH: HARSH: HARSH: वैतागवाड़ी: कुछ कांच हैं, कोई...
कवि और उसकी कविता
कवि और उसकी कविता
बहती है जैसे
वीरान घाटियों मैं
अपार जल राशि लिए
एक चंचल सरिता
नदी के दो किनारे हैं
पानी को अपने मैं समेटे
उसके मजबूत सहारे हैं
... :
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