Monday, 17 August 2015

jaldee


                जल्दी जमा दोज  हुए
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मानवता को छोड़ आज आदमी देखो आदमखोर हुआ.
स्वार्थ  में अँधा होकर ये परहित धर्म को भूल गया.
करने को  तो थे परहित  के  इस  जग  में  काम बहुत से.
अपनों को खुश करने मैं लगा रहा नादाँ औरों को भूल गया.
पाकर  छोटा  सा  पद भी मूरख उसके मद मैं चूर हुआ.
मानवता को छोड़ आज आदमी देखो आदमखोर  हुआ.
ऊपर बैठा है जो काला गोरा देखने वाला सब कुछ देख रहा.
अहंकार  के आगे नादाँ सर्वशक्तिमान शासक को भूल गया.
जाने  कितने  लोगों  के आदमखोरों ने सपने  चकना  किये
भूल गए मगर इस सच्चाई को नादाँ ऐसे जल्दी जमी दोज़ हुए

-----------------------------रमाकांत बड़ारया "बेताब " दुर्ग 

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