***********आस्तीन का सांप बनके ***********
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कोई भी सक्स अपना,दिल खोलकर नहीं रखता .
अंदर से जैसा होता है,बाहर वैसा वो नहीं दिखता.
अंदर से जैसा होता है,बाहर वैसा वो नहीं दिखता.
सामने जब भी आता ,मसीहा वो सबको लगता .
आस्तीन का सांप बन के ,अक्सर वही डसता
आस्तीन का सांप बन के ,अक्सर वही डसता
अपनी पोल खुलने का ,खौफ जिसको होता ..
"बेताब" अकड़कर सामने वही,बातें बड़ी करता .
"बेताब" अकड़कर सामने वही,बातें बड़ी करता .
सामने हर वक़्त जो ,बगावत की भाषा उगलता .
छुप-छुप कर विरोधियों के गले,अक्सर मिलता
छुप-छुप कर विरोधियों के गले,अक्सर मिलता
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