Monday, 17 August 2015

***********नादान नहीं रहे हम *************
=============================
सावधान रहना
निकल पड़े हैं
गली गली में,गाँव गाँव में 
बदनाम बस्ती के लोग
मगर मच्छ के
आंसू बहाने वाले लोग
बगुला भगत \
अवसर पाकर दबोचते रहे हैं
मछली की तरह
इंसानो को
स्वार्थ सिद्दीके लिए
लूटने से भी और
लुटाने से भी
नहीं चूके
मूँद लीं थी ऑंखें
बर्बाद करने से भी नहीं चूके
इंसानियत को
सावधान रहना
निकल पड़े हैं
गली गली में गाँव गाँव में
बदनाम बस्ती के लोग
खोजने उनको
बर्बाद हुये थे जो
कभी उनके ही कुृत्यो से
कहने समझाने उनको
आबाद नहीं किया है
तुम्हे अब तकम शासक ने
अवसर दो अपना लो हमको फिर से
तौबा कर ली है हमने
वादा करते हैं हम
आने नहीं देंगे वापस
दुर्दिन वह दिन
कैसी विडंबना है
चाहता है वह उसी से शरण
जिसका
किया था जिसने बलात अपहरण
सावधान रहना
ञ्जक्ल पड़े हैं
गली गली में गाँव गाँव
बदनाम बस्ती के लोग
जब भी आएं पास तुम्हारे
कहो उनसे
आज तुम हो जहाँ
वही जगह है तुम्हारे लिए बेहतर
मत करो शोर वरना
हो जाएगी तुम्हारी हालत
उससे से भी बदतर
उबरे नहीं हो तुम अब तक
अच्छी तरह जानते हो तुम
नादान नहीं रहे हम
अच्छी तरह समझ गए हैं हम
उस सर्प की तरह हो तुम
पीकर दूध भी
मरने से जो नहीं चूकता फन
भूल गए हो तो कर लो याद
दूध का जला हुआ
फूक फूक कर भी
पीता है छाछ !!

No comments:

Post a Comment