***** संगी का इही ल कइथे प्यार ****
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चल संगी चल
मोर संग चल
नई सुहाए मोल कोनो
चल संगी -----------
नई दुनिया बसाबो
जी भर के गुठियाबो
अपन जंगी ल
खुश हाल बनाबो
चल संगी------------
मोर संगी
समझ नई आवे मोला
कला कईथे प्यार
हाथ माँ डारे हाथ
जॉन मन जाथें
मेला मंडी अउ बाजार
मन माँ बस जाथे कौनो
जेखर आथे
संझा -बिहनिया
याद आथे बार -बार
का इही ल कैथे प्यार
अपन दाई ददा के
भुला के दया मया
छोड़ देथें घर द्वार
संगी का इही ल
कईथे प्यार
संगी मोला नई भावे
अइसन प्यार
झन कहिबे संगी फेर
चल संगी चल
मोर संग चल
नई भुला सकों मैहा
दाई ददा के प्यार
-------रमाकांत बड़ारया "बेताब" दुर्ग
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चल संगी चल
मोर संग चल
नई सुहाए मोल कोनो
चल संगी -----------
नई दुनिया बसाबो
जी भर के गुठियाबो
अपन जंगी ल
खुश हाल बनाबो
चल संगी------------
मोर संगी
समझ नई आवे मोला
कला कईथे प्यार
हाथ माँ डारे हाथ
जॉन मन जाथें
मेला मंडी अउ बाजार
मन माँ बस जाथे कौनो
जेखर आथे
संझा -बिहनिया
याद आथे बार -बार
का इही ल कैथे प्यार
अपन दाई ददा के
भुला के दया मया
छोड़ देथें घर द्वार
संगी का इही ल
कईथे प्यार
संगी मोला नई भावे
अइसन प्यार
झन कहिबे संगी फेर
चल संगी चल
मोर संग चल
नई भुला सकों मैहा
दाई ददा के प्यार
-------रमाकांत बड़ारया "बेताब" दुर्ग
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