फूल गुलाब का लेकर जितने भी लोग मिले
अक्सर ही वे तन के उजले मन के मैले मिले
अक्सर ही वे तन के उजले मन के मैले मिले
हमको नही रहा किसी से भी शिकवा गिला
कदम ताल करते हुये साथ सबके चलते रहे
कदम ताल करते हुये साथ सबके चलते रहे
था दिलों मैं खोट रंग उनका बदलता रहा
था दमन अपना साफ हम उनसे बचे रहे
था दमन अपना साफ हम उनसे बचे रहे
इश्क़ और युद्ध मैं हैं सब जायज है कहने वाले
"बेताब "हमको लम्बी -लम्बी कतारों मैं मिले
"बेताब "हमको लम्बी -लम्बी कतारों मैं मिले
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