Monday, 17 August 2015

___नसीहतें हम लाख उनको देतेरहे -____
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फूल गुलाब का लेकर जितने भी लोग मिले
अक्सर ही वे तन के उजले मन के मैले मिले
हमको नही रहा किसी से भी शिकवा गिला
कदम ताल करते हुये साथ सबके चलते रहे
था दिलों मैं खोट रंग उनका बदलता रहा
था दामन अपना साफ हम उनसे बचे रहे
इश्क़ और युद्ध मैं सब जायज है कहने वाले
"बेताब "हमको लम्बी -लम्बी कतारों मैं मिले
अपनी आदत से कभी भी बाज नहीं आये लोग
सुबह -शाम नसीहतें हम लाख उनको देते रहे
------------रमाकांत बड़ारया "बेताब" दुर्ग

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