*************नहींन सोचने वाले लोग ************
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"कितना भी समझाओ यारो , नहीं समझने वाले लोग
जिसको जो करना है करने से, बाज नहीं आने वाले लोग
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"कितना भी समझाओ यारो , नहीं समझने वाले लोग
जिसको जो करना है करने से, बाज नहीं आने वाले लोग
अपनी ढपली अपना राग ,अलापने मैं खर्च नहीं आता है
किसकी जिंदगी मैं फर्क पड़ेगा , नहीं सोचने वाले लोग
किसकी जिंदगी मैं फर्क पड़ेगा , नहीं सोचने वाले लोग
सुबह से लेकर शाम तलक जो, खेतों मैं खून पसीना करता है
उसकी मेहनत पर भी डाका, डालने से यहां नहीं चूकते लोग
उसकी मेहनत पर भी डाका, डालने से यहां नहीं चूकते लोग
समझदारी से मिल -जुलकर ,परिवार चलाने जिम्मा है जिनका
"बेताब "मिल जुलकर रहने के,बदले राह अलग बनाते मिलते लोग
"बेताब "मिल जुलकर रहने के,बदले राह अलग बनाते मिलते लोग
नैतिकता का पाठ पढ़ना आदर्श सामने रखना जिम्मा जिनका
आदर्शों की बखिया उघाड़ने मैं , वही यहां यारो लगे हुये लोग
आदर्शों की बखिया उघाड़ने मैं , वही यहां यारो लगे हुये लोग
अपना क्या है हमने जो भी देखा , बाँट लिया अपना दुःख -दर्द
फर्ज समझ कर दिया उजागर मर्ज ,दवा बनेगे खुद इसकी लोग .
फर्ज समझ कर दिया उजागर मर्ज ,दवा बनेगे खुद इसकी लोग .
------------------------रमाकांत बड़ारया "बेताब " दुर्ग
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