Monday, 17 August 2015

*********कोशिश कर रहा है --------!!!!!
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बनकर कांटा पैरों में चुभ गया था जो
सुंदर फूल बनकर महकने की देखो
व्यर्थ कोशिश कर रहा है कल-आज-कल
कण बनकर आँखों में घुस गया था जो
काजल बन आँखों मैं लगने की देखो
व्यर्थ कोशिश कर रहा है कल आज- कल
बनकर घातक रोग लग गया था जो
राम बाण दवा बन दर्द हरने की देखो
कोशिश कर रहा है कल आज- कल
चढ़कर छोटी पर फिसल गया था जो
खुद को पहाड़ साबित करने की देखो
व्यर्थ कोशिश कर रहा है कल आज -कल
बनकर अंधकार घर मैं छा गया था जो
सूरज बनकर उजाला करने की देखो
व्यर्थ कोशिश कर रहा है कल आज -कल
अनगिनत घाव दिया था बदन पर जो
घावों इर मरहम पट्टी करने की देखो
व्यर्थ कोशिश कर रहा है कल आज - कल

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