****************जूगाड़ और जुगाड़ू ***************
====================================
जुगाड़ूपन
गजब की कला है
लोग इसे अब अपना
जन्म सिद्ध अधिकार
समझने लगे हैं
गनीमत है
कानूनन अधिकार नहीं समझते
जुगाड़ू होना ,अब
छुपता नहीं है
खोजी किस्म के लोग
छुपने भी नहीं देते
ऐसे लोग
इसी बहाने अपना नाम
आगे कर लेते हैं
अपनी मंशा का इजहार
कर लेते हैं
जुगाड़ू किस्म के लोग
जुगाड़ू नश्ल के लोग
बेसरम के पौधे की तरह
हर जगह मिलेंसे
जिनकी कोई औकात नहीं
गुलाब के फूल की तरह
महकते दिखेंगे
हर की ख्वाहिश होती है
====================================
जुगाड़ूपन
गजब की कला है
लोग इसे अब अपना
जन्म सिद्ध अधिकार
समझने लगे हैं
गनीमत है
कानूनन अधिकार नहीं समझते
जुगाड़ू होना ,अब
छुपता नहीं है
खोजी किस्म के लोग
छुपने भी नहीं देते
ऐसे लोग
इसी बहाने अपना नाम
आगे कर लेते हैं
अपनी मंशा का इजहार
कर लेते हैं
जुगाड़ू किस्म के लोग
जुगाड़ू नश्ल के लोग
बेसरम के पौधे की तरह
हर जगह मिलेंसे
जिनकी कोई औकात नहीं
गुलाब के फूल की तरह
महकते दिखेंगे
हर की ख्वाहिश होती है
बेटा- बेटी
डाक्टर बने ,इंजीनियर बने
काबलियत हो न हो
जुगाड़ू जुगाङकर बना ही लेते हैं
बेचारे काबिल
हाथ मलते रह जाते हैं
हमने देखा है
डाक्टर का बेटा अक्सर डाक्टर है
इंजीनियर का बेटा ही
इंजीनियर बनता है
वकील का बेटा
वकील और जज बनता है
आई .ए.एस ,या
आई.पी.एस का बेटा ही
समकक्ष पद पर पहुचता है
नेता का बेटा -बहू
भाई -भाभी
पत्नी चचा चाची
सासद -विधायक
मुख्या मंत्री या मंत्री बनता है
ये मैं नहीं कहता
व्यापम .ख्यापम् .अलापम कहता है
हर जगह यही मिलेंगे
जिनकी कोई औकात नहीं
हर की कोशिश होती है
उच्च पद पावर मिले
रोबदार ओहदा विभाग मिले
घपले करने का लाइसेंस मिले
पकड़े जाने पर
बचानेवाला
ताकतवर गॉडफादर मिले
अब तो साहित्यकार भी
जुगाड़ू साबित होने मैं
अच्छे अच्छे लोगों को
मत देने मैं माहिर हो गए हैं
पद हथियाने की होड़ मैं लगे हैं
साहित्य श्रजन अब
साइड बिजनेस हो गया है
मंत्री पद का उनको भी चस्का लगा है
घपलों मैं पर्दा डालने की कला मैं
क़र्ज़ माफ़ करवाने मैं
मददगार हो रहे हैं
रिस्ता निभाने का
व्यापर कर रहे हैं
आँख मुड़कर ज़हर पी रहे हैं
हंसी आती हैं उन पर
इस पर चोट करने की
जिम्मेवारी थी जिनपर
अपना मूल उद्देश्य भूल कर
ओछी राजनीती मैं उलझ गए हैं
राजनीतिज्ञ पार्टियां हों
खेल संघ हों ,सामाजिक संघठन हों
साहित्यिक समितियां -संघ हों
प्रायोजित आयोजन हों
नेता हो -अभिनेता हों
खिलाड़ी हों -सामाजिक कार्यकर्ता हों
सबका एक ही मकसद है
इन केन पराकेंन
जुगाड़ से
पद -पावर
कुर्सी हासिल करना
पीढ़ों के लिए ओ सब हासिल करना
जिसकी दिल मैं हो तम्मन्ना
डाक्टर बने ,इंजीनियर बने
काबलियत हो न हो
जुगाड़ू जुगाङकर बना ही लेते हैं
बेचारे काबिल
हाथ मलते रह जाते हैं
हमने देखा है
डाक्टर का बेटा अक्सर डाक्टर है
इंजीनियर का बेटा ही
इंजीनियर बनता है
वकील का बेटा
वकील और जज बनता है
आई .ए.एस ,या
आई.पी.एस का बेटा ही
समकक्ष पद पर पहुचता है
नेता का बेटा -बहू
भाई -भाभी
पत्नी चचा चाची
सासद -विधायक
मुख्या मंत्री या मंत्री बनता है
ये मैं नहीं कहता
व्यापम .ख्यापम् .अलापम कहता है
हर जगह यही मिलेंगे
जिनकी कोई औकात नहीं
हर की कोशिश होती है
उच्च पद पावर मिले
रोबदार ओहदा विभाग मिले
घपले करने का लाइसेंस मिले
पकड़े जाने पर
बचानेवाला
ताकतवर गॉडफादर मिले
अब तो साहित्यकार भी
जुगाड़ू साबित होने मैं
अच्छे अच्छे लोगों को
मत देने मैं माहिर हो गए हैं
पद हथियाने की होड़ मैं लगे हैं
साहित्य श्रजन अब
साइड बिजनेस हो गया है
मंत्री पद का उनको भी चस्का लगा है
घपलों मैं पर्दा डालने की कला मैं
क़र्ज़ माफ़ करवाने मैं
मददगार हो रहे हैं
रिस्ता निभाने का
व्यापर कर रहे हैं
आँख मुड़कर ज़हर पी रहे हैं
हंसी आती हैं उन पर
इस पर चोट करने की
जिम्मेवारी थी जिनपर
अपना मूल उद्देश्य भूल कर
ओछी राजनीती मैं उलझ गए हैं
राजनीतिज्ञ पार्टियां हों
खेल संघ हों ,सामाजिक संघठन हों
साहित्यिक समितियां -संघ हों
प्रायोजित आयोजन हों
नेता हो -अभिनेता हों
खिलाड़ी हों -सामाजिक कार्यकर्ता हों
सबका एक ही मकसद है
इन केन पराकेंन
जुगाड़ से
पद -पावर
कुर्सी हासिल करना
पीढ़ों के लिए ओ सब हासिल करना
जिसकी दिल मैं हो तम्मन्ना
No comments:
Post a Comment