*************सिहर उठता हूँ सोच कर !**********
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उदास चेहरे पै आ गई रौनक हमारे उन्हें देखकर
होश गवा बैठे हम पल - भर उनको निहार कर
घर के रहे न घाट के हम हँस कर उनसे बात कर
घर का रास्ता भूल गए हम नाजनीन की याद कर
इरादे समझ सके ना हम उनकी मासूमियत को देखकर
हम अपना सर्वस्त्र लुटा बैठें साथ एक पल गुजार कर
भूल हुई भारी ऐ -खुदा माफ़ कर मुझपे अहसान कर
महगा बड़ा पड़ा मुझे ये सफर सिहर उठता हूँ सोचकर
---------------------रमाकांत बड़ारया "बेताब" दुर्ग
(२१-९-२०१५बैठे ठाले )
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उदास चेहरे पै आ गई रौनक हमारे उन्हें देखकर
होश गवा बैठे हम पल - भर उनको निहार कर
घर के रहे न घाट के हम हँस कर उनसे बात कर
घर का रास्ता भूल गए हम नाजनीन की याद कर
इरादे समझ सके ना हम उनकी मासूमियत को देखकर
हम अपना सर्वस्त्र लुटा बैठें साथ एक पल गुजार कर
भूल हुई भारी ऐ -खुदा माफ़ कर मुझपे अहसान कर
महगा बड़ा पड़ा मुझे ये सफर सिहर उठता हूँ सोचकर
---------------------रमाकांत बड़ारया "बेताब" दुर्ग
(२१-९-२०१५बैठे ठाले )
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