*********रौनक गायब होनी ही थी***********
=================================
कल तक तो साहब के चेहरे पर बेहद रौनक थी
कल तक तो साहब के चेहरे पर लाली छाई थी
आज साहब के चेहरे पर मायूसी का डेरा है
आज हुआ ऐसा क्या साहब के माथे पर चिंता थी
कल तक साहब के घर महफ़िल थी जमती जमकर
आज साहब के घऱ की रौनक बिलकुल गायब थी
शह और मात का गंदा खेल बहुत खेला साहब ने
इक दिन साहब के घर की रौनक गायब होनी ही थी
=
============रमाकांत बड़ारया "बेताब" दुर्ग
=================================
कल तक तो साहब के चेहरे पर बेहद रौनक थी
कल तक तो साहब के चेहरे पर लाली छाई थी
आज साहब के चेहरे पर मायूसी का डेरा है
आज हुआ ऐसा क्या साहब के माथे पर चिंता थी
कल तक साहब के घर महफ़िल थी जमती जमकर
आज साहब के घऱ की रौनक बिलकुल गायब थी
शह और मात का गंदा खेल बहुत खेला साहब ने
इक दिन साहब के घर की रौनक गायब होनी ही थी
=
============रमाकांत बड़ारया "बेताब" दुर्ग
No comments:
Post a Comment