********************यही है इतिहास**************
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दिन पर दिन
गुजरते चले गए
समय बीत गया
समय जीत गया
हम हार गए
बहुत चले मगर
जहाँ के तहँ रहे
कहते हैं सयाने
कहें अगर बड़े तो मानें
हम कहाँ मानते हैं पर
हमे हमारा रास्ता ही
सही और
सफल होने वाला दिखता है
जब वास्तविकता
सामने आती है तो बंधू
धरातल पर नज़र आते हैं
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दिन पर दिन
गुजरते चले गए
समय बीत गया
समय जीत गया
हम हार गए
बहुत चले मगर
जहाँ के तहँ रहे
कहते हैं सयाने
कहें अगर बड़े तो मानें
हम कहाँ मानते हैं पर
हमे हमारा रास्ता ही
सही और
सफल होने वाला दिखता है
जब वास्तविकता
सामने आती है तो बंधू
धरातल पर नज़र आते हैं
कहीं प्यार तमाशा है
कहीं प्यार कहानी है
कहीं हंसती है
कहीं रोती जवानी है
फिर भी
रहस्य और रोमांस
इसके पीछे
भाग रहा है नादान
क्या है काम का
और क्या है बे-काम
समझ नहीं पा रहा नादान
समझ अगर जाये तो
है वह इंसान
अगर ना समझे तो
समझो है वह हैवान
समझ यही तो है
जानवर से इंसान की पहचान
कहीं प्यार कहानी है
कहीं हंसती है
कहीं रोती जवानी है
फिर भी
रहस्य और रोमांस
इसके पीछे
भाग रहा है नादान
क्या है काम का
और क्या है बे-काम
समझ नहीं पा रहा नादान
समझ अगर जाये तो
है वह इंसान
अगर ना समझे तो
समझो है वह हैवान
समझ यही तो है
जानवर से इंसान की पहचान
तीन किस्तों में
अपनी जिंदगी
जी रहा है आदमी
बचपना -जवानी और बुढ़ापा
बचपने पर जवानी आती है
जवानी पर बुढ़ापा
जवानी वक़्त को
वश में करने की
कोशिश करती है
मगर वक़्त
जवानी को वाश में कर लेता है
आदमी मजबूर हो जाता है
फिर गुजरा हुआ
ज़माना याद आता है
अपनी जिंदगी
जी रहा है आदमी
बचपना -जवानी और बुढ़ापा
बचपने पर जवानी आती है
जवानी पर बुढ़ापा
जवानी वक़्त को
वश में करने की
कोशिश करती है
मगर वक़्त
जवानी को वाश में कर लेता है
आदमी मजबूर हो जाता है
फिर गुजरा हुआ
ज़माना याद आता है
मानव जीवन
चिंगारी की तरह होता है
जो पल भर के लिए चमकती है
फिर भुझ जाती है
मानव जीवन
एक सरिता की तरह है
जो टेढ़ी-मेढ़ी चलती है
कहीं श्रजन करती है
कहीं करती है विनाश
यही है इतिहाश
चिंगारी की तरह होता है
जो पल भर के लिए चमकती है
फिर भुझ जाती है
मानव जीवन
एक सरिता की तरह है
जो टेढ़ी-मेढ़ी चलती है
कहीं श्रजन करती है
कहीं करती है विनाश
यही है इतिहाश
कहीं जन्म की खुशी है
कहीं मृत्यु से शोक
कहीं शादी की रश्में हैं
कहीं चिता की तैयारी
कहीं कोई
जीवन साथी की तलाश में
कहीं कोई
जीवन साथी से छुटकारा पाने
प्रयासो में रत
कहीं मृत्यु से शोक
कहीं शादी की रश्में हैं
कहीं चिता की तैयारी
कहीं कोई
जीवन साथी की तलाश में
कहीं कोई
जीवन साथी से छुटकारा पाने
प्रयासो में रत
कहीं दो प्रेमी
एक होने प्रयत्नशील
कहीें दो भाई
जुदा होने की तैयारी में
कोई नव-निर्माण में व्यस्त
कोई कर रहा
वि -ध्वंशक की तैयारी
क्या हम आगे बढ़ रहे हैं
या जा रहे सदियों पीछे
कह नहीं सकते बंधू
यहां कौन क्या
क्या सपने ग़ढ रहा है?
एक होने प्रयत्नशील
कहीें दो भाई
जुदा होने की तैयारी में
कोई नव-निर्माण में व्यस्त
कोई कर रहा
वि -ध्वंशक की तैयारी
क्या हम आगे बढ़ रहे हैं
या जा रहे सदियों पीछे
कह नहीं सकते बंधू
यहां कौन क्या
क्या सपने ग़ढ रहा है?
------रमाकांत बड़ारया "बेताब " दुर्ग
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**********२२-११-१९७६*************
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**********२२-११-१९७६*************
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